Friday, August 15, 2008

A good poem on Independence

यह समझो देश को स्वाधीनता यों ही मिली हें |

हर कली इस बाग की कुछ खून पी कर ही खिली हैं ||

बिछ गये वो नीव में दीवार के नीचे गढ़े हैं |

महल अपने शहीदों की छातियों पर खड़े हैं ||

नीव के पत्थर तुम्हे सौगंध अपनी दे रहे|

जो धरोहर दी तुम्हे हाथ से जाने देना ||

राष्ट्रा के शृंगार मेरे देश के साकार सपनों|

देश की स्वाधीनता पर आँच तुम आने देना||


1 Comments:

Anonymous Anonymous said...

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February 11, 2010 3:33 PM  

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